Monday, March 12, 2018

Art Vibration - 490



Social Media  To Print Media

Friends you know after year 2008 I am continue active on social media for  visual art or that’s right promotion from  my art activities , that activities are painting, writing and talking on art . I have shared lots of on my social media  and near 10,000 to 20, 000 social media users  are knowing to my art sound . so I am feeling I am doing a right job on social media about visual art . 

Its result is  coming in front of myself . one example is here for your notice . last month a senior literature person / writer  , awarded of national academy of literature  Sir Bulaki  Sharma called to me , he demanded to me a article on modern  art . he putted a question  in front side of myself as a subject of article , he asked to me why common viewers are not understand to modern  art ?

 So as a painter I taken his question for a right article or in 300 to 400 words of Hindi I wrote that and shared with him in very short time . Writer Bulaki Sharma Ji told me I will use it for print media . 

Last week that article was published  by A Daily News Paper of Bikaner , that’s name is Dainik Bhaskar ,
The article was come out in print media through social media . My social communication nature created this task for me and I could completed that in very short time with right logic or with basic problems of common viewers. 

 Here I want to share that’s article  in original form  or a image of print media .for your notice .
Article is in Hindi  so I think  you will translate it in your own language for your easy reading ..thanks..

क्यों नहीं समझ पाते आधुनिक कला को आम दर्शक ?

ये एक सवाल है अपने आप में जो मुझे अक्सर ये सोचने पर मजबूर करता है  मेरे सृजन को और  परिष्कृत  करने को, और  मैं  निरंतर इस में सलंग्न हूँ एक आधुनिक कला का सृजक होने के नाते !
मेरी दृस्टि में किसी भी वस्तु, आयाम, विचार, चिंतन को अपने निजी अनुभव से  प्रस्तुत करना बिना किसी परंपरागत पहलु को छुए वही आधुनिक है , या एक प्रस्तुति करण अपने निजी  अंदाज का  जिसे न पहले किसी ने कहा, रचा न वर्तमान में और भविष्य में कोई अनुसरण करेगा तो वो परंपरागत प्रस्तुति करण का रूप धारण कर  लेगा,  सो विषय ये भी नहीं है !

सरलीकरण के लिए यहाँ मैं  आधुनिक शब्द को उपियोग में ले रहा हूँ ताकि ये  समझ आये आम पाठक को !
आधुनिक कला का आम दर्शक से सीधा कोई सम्बन्ध सतही रूप पर नजर नहीं आता है पर अन्तर सम्बंध वैसा ही है जैसा की परंपरागत और यथार्थ कला का है !
हिंदी की शब्द शक्ति के उदहारण से मैं  इसे स्पष्ट कर सकता हूँ क्यों की शब्द भी  रूप है अंतर ध्वनि का और समस्त कलाएं सृजित होती है अंतर ध्वनि के दिशा निर्देश से ! ये बात लेखक और कलाकार दोनों ही बखूबी जानते है या  रचना संसार का यही मूल आधार है !

शब्द शक्ति तीन प्रकार की होती है अभिधा , लक्षणा और व्यंजना !
अभिधा में - वे  सरल से वाक्य  आते है  जिनको जैसा पढ़ा जाता है उनका अर्थ भी शब्द के अनुरूप ही होता है ! जैसे कि राम घर जा रहा है ! 

 लक्षणा में - वे वाक्य आते है जिनका शाब्दिक अर्थ शब्द से  भिन्न  होता है ! जैसे की राम गधा है , यहाँ राम के चरित्र पर सांकेतिक व्यंग है जो उसके लक्षण को प्रस्तुत करने की कोशिश है  शब्द से !
 इसी तरह व्यंजना में - वे वाक्य  आते है  जिनके अनेका अनेक अर्थ निकलते है ! उदहारण के लिए  घडी में चार बजे है ! अब इस वाक्य का  सब के लिए अनेका अनेक अर्थ स्वतः ही बनता  है !

ठीक यही पद्धति  आधुनिक कला के सन्दर्भ में भी सटीक बैठती है !
अभिधा को कला में यथार्थ कला शैली से जोड़कर समझ सकते है ! यथार्थ चित्र या कला अपने स्वरुप से सब कुछ स्पष्ट कर देती है अतः दर्शक को सिर्फ अपनी आँखों  से कला अभिव्यक्ति का अवलोकन मात्र ही करना पड़ता है ! दृश्य प्रकृति का हो या दैनिक  जीवन का दर्शक को सब कुछ मूर्त रूप में तैयार मिलता है ! रसा स्वादन हेतु !

जबकि लक्षणा में वो कला अभिव्यक्ति ली जा सकती है जो संकेतो, प्रतीकों में कलाकार के विचार और दर्शन को प्रस्तुत करती है ! ये कला अभिव्यक्ति आम दर्शक के समझ में सहजता से नहीं आती ! कारण स्पष्ट है की आम दर्शक यथार्थ में जीता है ! उसे सरल और सुलभ दृश्य अवलोकन की आदत है ! जबकि कलाकार या रचेता के लिए लक्षणा में कला प्रस्तुति सरल और सहज होती है !

उसी प्रकार व्यंजना में  उन अति आधुनिक कला अभिव्यक्ति को ले सकते है जो सिर्फ कलाकार या रचेता के मन की उन संवेदनात्मक क्रियाओं का सृजनात्मक प्रस्तुति करण है ! आधुनिक कला में उसे प्रयोगात्मक , एक्शन , फंतासी ,एब्स्ट्रक्शन , इंस्टालेशन आदि नाम से सम्बोधित किया  है ! जो कलाकार या रचेता को तो मानसिक उथल पुथल से मुक्त  कर देता है!  साथ ही दर्शक  मुक्त भाव से अवलोकन करने और उसके बारे में चिंतन मनन करने को  खुला स्पेस पाता है  ! जिसे चिंतन शील दर्शक तो समझ या पकड़ पाते है पर आम दर्शक उसे  अति आधुनिक कहते हुए साइड से निकल जाते है ! क्यों की उनके  पास न तो इतना समय है की वो आम जीवन की आपा धापी से मुक्त होकर कुछ पल रचनात्मक क्रियाओं के लिए निकाल पाए और अगर निकाल भी लेवे तो भी कला के उन उच्च  तर्क और मीमांशा की दृस्टि वाले प्रस्तुति करण  को ठीक से ग्रहण कर पाए इतना समय और चिंतन की दृष्टि वे बना ही नहीं पाते ! 

और जब आम  दर्शक और कलाकार के मध्य  समय का अभाव होगा तो कला का सम्प्रेषण सेतु भी बिखरेगा ! मुझे आधुनिक कला  के सन्दर्भ में यही पीड़ा सताती है की समय के साथ कलाकार और उसकी कला ने यात्रा की पर इस यात्रा में उसका आम दर्शक पीछे छूट गया या छूट रहा है ! 

आम दर्शक को भी समय के साथ बदलना जरुरी है क्योंकि कलाएं दर्शक को शिक्षित , परिष्कृत , चिंतनशील , विचारशील  ,आलोचक और समालोचक के रूप में तैयार करती है ताकि वे समाज में संस्कृति के सही मूल्यों को स्थापित  कर सके आगे आने वाली पीढ़ी के लिए। ...

योगेंद्र कुमार पुरोहित
मास्टर ऑफ़ फाइन  आर्ट
बीकानेर, इंडिया 



So this article  come in print media  through  my social media  . writer  Sir Bulaki Sharma  collected it and Editor  /Writer  Sir Madhu Acharya published it in his editorial .
 So here I said it .. social media to Print media …

Yogendra kumar purohit
Master of Fine Art
Bikaner, INDIA

Wednesday, February 28, 2018

Art Vibration - 489



BTF 2018


Writer Bhawani Shankar vyas Vinod, Madhu Achary and deepchand sankhla
This post is in Hindi because many theater artist or theater viewers are not know English , this post is specially for them about their theater interest  so it is in Hindi. I sure  you will translate it in your own language by support of translator on online  format. Thanks  plus sorry  too ..

Myself at Rachanakar Samelan of BTF 2018
 
Its about Bikaner theater festival 2018 of Bikaner. I sure visuals will tell you full story about this theater festival without any words .
Actress Ratna Pathak Shah  in Opening Ceremony of BTF  2018 at Hansha Guest House BKN .


बीकानेर थिएटर फेस्टिवल २०१८ , दिनांक २४ से २७ फ़रवरी २०१८ बीकानेर ! गत तीन साल से बीकानेर रंग जगत बीकानेर थिएटर फेस्टिवल का आयोजन  करते आ रहा है ! इस बार ये   तीसरा थिएटर फेस्टिवल रहा जिसे एक्टर स्वर्गीय शशि  कपूर जी की याद में आयोजित किया गया ! ये एक सच्चा सम्मान था रंग जगत के एक महान कलाकार को बीकानेर थिएटर फेस्टिवल की ओर  से  !
वही ये थिएटर फेस्टिवल बीकानेर के युवा रंग जगत के लिए एक सीधे कला शिक्षण का स्कूल साबित होता सा प्रतीत हुआ मुझे !
live talk on theater  by Actress Ratna pathak Shah for BTF 2018
Bikaner theater Celebrity  Sir Om soni and T.M. Lalani


फेस्टिवल को दो धाराओं में बाँट कर मै   देख रहा हूँ ! एक जो सिर्फ रंग जगत के कलाकारों के लिए तो दूसरी रंग दर्शक को शिक्षित करने के लिए !

 
प्रथम धारा में समारोह के उन आयोजनो  को ले रहा हूँ जो की रंग कार्यशाला , नाट्य पुस्तकों की प्रदर्शनी  और खुला संवाद रंग मंच के विषयों पर कुछ चुनिंदा विशेषज्ञों के साथ  ! ये सब  रंग कर्मियों के लाभार्थ रखा गया और संभवतः युवा रंग कर्मियों ने इसका भरपूर लाभ लिया होगा जो जरुरी भी था उनको शिक्षित और परिष्कृत करने को !
 Actor Ashok Banthiya in BTF 2018
live talk with Ashok banthiya on theater in BTF 2018

Nirmohi vyas reward to Actor S.D. Chouhan  Bikaner by BTF or ANURAG KAKA KENDRA 2018


दूसरी धारा में वे नाट्य जो की इस फेस्टिवल में दिखाये  गए, रंग दर्शक को ! उनमे अनेक विधाओं और विषयों को रंग दर्शक के सामने रखा उनके  मानसिक मनन हेतु , दर्शक को सही रूप में शिक्षित करने हेतु रंग नाट्य विधा के माध्यम से  ! इस नाट्य समारोह  ने दर्शक को नाट्य की अनेक  विधाओं से परिचय करवाया !  जिनमे आधुनिक , पौराणिक, फ़ारसी और लोकनाट्य विधा का समावेश लगभग सभी नाट्य प्रस्तुति में देखने को मिला रंग दर्शक को ! जो उसके लिए  वास्तव में नाट्य विधा से और रूबरू होने जैसा ही था !

Hansh Raj Daga  promoting to BTF 2018 from His hansha Guest House  2018


Director Gopal Acharya , Sudhesh vyas and Vijay Kumar Naik at BTF 2018
मोटे तौर  पर कहूं तो ये थिएटर  फेस्टिवल अपने आप में बीकानेर के रंग कर्मी और रंग दर्शक दोनों को वैचारिक रूप से विकसित करने का एक सार्थक प्रयोजन था जिसमे आयोजक काफी हद तक सफल  हुए है सो वे साधुवाद के पात्र है !
समारोह में नाट्य विधा से जुड़े कई वरिष्ठ रंग कर्मी सीधे सीधे बीकानेर के रंग दर्शक और   कलाकारों से जुड़े जिनमे एक्टर रतना पाठक शाह , सीमा बिस्वास ,अशोक बांठिया , मधु आचार्य "आशावादी "ओम  थानवी जी  संवाद के जरिये सब से रूबरू हुए और उस संवाद से कई प्रेरणा स्पद बाते  कलाकार को सुनने समझने को मिली !
 

समारोह में करीब १६ नाट्य प्रस्तुति हुई जो देशभर से आये रंग कलाकारों ने अपनी टीम के साथ प्रस्तुत की ! इन १६ नाट्य प्रस्तुति में  १४ नाट्य प्रस्तुति मंच पर खेली गयी तो दो प्रस्तुति बॉक्स थिएटर  नाट्य विधा में  प्रस्तुत की गयी ! इस नाट्य समारोह में देश भर   से आयी नाट्य  मण्डलियों  में बरेली , जयपुर ,असम , ,भोपाल , मुंबई ,चण्डीगढ़, दिल्ली , पुणे के साथ बीकानेर की नाट्य मण्डली  भी शामिल रही ! नाट्य प्रस्तुति एक से बढ़कर एक रही , मोटे तौर पर मै यही कहूंगा की  सभी नाट्य प्रस्तुतियों में शेक्सपियर के नाट्य दर्शन और कुछ में तो नाट्य रूपांतरण भी देखने को मिला वो भी भारतीय नाट्य व  लोक नाट्य रंग की पूट  के साथ ! तो एक बात सपष्ट हुई की पुरे भारत में रंग कर्मी एक समकालीन और प्रयोगात्मक नाट्य शैली में कार्य कर रहे है ! नयी और पौराणिक विधा  का समावेश करते हुए !
live talk with Theater  expert sir Madhu acharya aashavadi  in BTF 2018 , master bikash k sharma asking question

 


इस नाट्य समारोह में एक बात बहुत रोमांचित  कर  रही थी वो ये थी की युवा रंग निर्देशक बड़े नाट्य प्रदर्शन का साहस और जोखिम लेने की क्षमता दिखा रहे थे,  तो वरिष्ठ रंगकर्मी अपने अनुभव से  सरल और सहज प्रस्तुति के जरिये अपनी  बात रंग दर्शक तक सम्प्रेषित कर रहे थे ! 
Sir Om Thanvi ji and Sudhesh vyas  in BTF 2018

इन रंग निर्देशकों के नाम इस प्रकार है जो की देश भर  से बीकानेर पधारे  रंग प्रस्तुति देने को इस बीकानेर थिएटर फेस्टिवल को वास्तव में रंग महोत्स्व का स्वरुप देने को !

 


live talk  with Om Thanvi  in BTF 2018
युवा रंग  निर्देशक लव तौमर ( बरेली ) , वरिष्ठ रंग निर्देशक श्री सौरभ श्रीवास्तव ( जयपुर  ) , रंग  निर्देशक सीमा बिस्वास( मुंबई   ) ,युवा रंग निर्देशक विपिन पुरोहित ( बीकानेर  ), युवा रंग निर्देशक सौरभ अनंत ( भोपाल  ), वरिष्ठ रंग निर्देशक प्रीता माथुर /अमन गुप्ता ( मुंबई ), युवा रंग  निर्देशक रमेश भाटी नामदेव ( जोधपुर  ), वरिष्ठ रंग निर्देशक राजेंद्र सिंह पायल ( जयपुर  ), वरिष्ठ रंग निर्देशक जी.एस.चैनी /हरलीन कोहली ( चण्डीगढ़  ), युवा रंग निर्देशक अजित सिंह पालावत ( जयपुर  ),  वरिष्ठ रंग निर्देशक के.एस.राजेंद्रन ( दिल्ली ), वरिष्ठ रंग निर्देशक विजय कुमार नाईक ( गोवा  ) , युवा रंग निर्देशक गगन मिश्रा ( जयपुर  ),  वरिष्ठ रंग निर्देशक दयानन्द शर्मा ( बीकानेर  ), युवा रंग निर्देशक मोहित टाकलकर ( जयपुर  ) , वरिष्ठ रंग निर्देशक जयंत देशमुख ( भोपाल  )!  इन सब ने  पूर्ण विश्वास  के साथ अपनी नाट्य मण्डली के सहयोग से बेहतरीन प्रस्तुति दी !  तीन साल के इन समारोह को रेखागणित के ग्राफ  से आंकलन करू तो मै ग्राफ की इस रेखा को ऊपर जाते हुए देख रहा हूँ जो विकास का संकेत है बीकानेर के रंग जगत का !

और ये सब संभव हुआ है बीकानेर के अनुराग कला केंद्र के कारण ! यहाँ मै  इस समारोह को एक माला की तरह देख रहा  हूँ जिसमे अनेक मोती है और उन मोतियों के मध्य एक सुमेरु मोती भी है जो माला का सूत्रधार होता है ! अनुराग के सूत्रधार सुधेश व्यास जो की स्वयं रंग निर्देशक , अभिनेता और रंग लेखक  भी है ! सुधेश व्यास ने जहाँ एक तरफ देश के विभ्भिन प्रांतो से नाट्य प्रस्तुति आमंत्रित की वही वरिष्ठ रंग कर्म विशेषज्ञों को भी समरोह में शामिल किया और उन सब के लिए सुव्यवस्था हो इसके लिए बीकानेर नगर निगम न्यास  , रेलवे मंडल बीकानेर ,पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र उदयपुर , हंसा गेस्ट हाउस बीकानेर और टी. एम.लालाणी सभागार बीकानेर  के साथ  होटल मिलेनियम बीकानेर तथा  आर एन बी शिक्षण संसथान बीकानेर  को भी बीकानेर थिएटर फेस्टिवल से जोड़ा ! इन सभी संस्थाओं ने अपने सहयोग से आये हुए अतिथियों को किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं होने दिया तथा  उनकी प्रस्तुति में जो संभव हो सके वो सब सहयोग मुहैया करवाया जो अपने आप में प्रतिबद्धता का एक जीवंत  प्रमाण है बीकानेर रंग जगत का ! 


अनुराग कला केंद्र ने इस वर्ष स्वर्गीय श्री निर्मोही व्यास सम्मान दिया बीकानेर के वरिष्ठ रंगकर्मी श्री एस डी  चौहान साहब को जो अपने आप में बहुत ही सम्मान की बात थी अनुराग कला केंद्र के लिए !

नाट्य प्रस्तुतिओं में नाटक कागजी पैरहन में लेखक के जीवन और उसकी लेखनी पर सामाजिक संकट को मंचित किया गया जिसे लिखा है इस्मत चगताई ने और निर्देशित किया लव तौमर ने !

 

नाटक मायने गंभीर होने के में निर्देशक श्री सौरभ श्रीवास्तव ने लेखक ऑस्कर वाइंड के नाटक को मंच पर खेला बतौर अभिनेता जिसमे शेक्सपियर के रोमियो जूलियट की पुट स्पष्ट नजर आ रही थी !
नाटक स्त्रीर पत्र  निर्देशक सीमा बिस्वास ने रवींद्र नाथ ठाकुर के लिखे नाटक को मंच से अभिनीत स्वयं ही किया और नारी दशा/ चिंतन को दर्शक तक सम्प्रेषित किया !

नाटक खेला पोलमपुर  निर्देशक विपिन पुरोहित ने लोक शैली में  लिखे नाटक खेला पोलमपुर जो की मणिमधुकर ने लिखा है हिंदी में और उसे  खेला  गया राजस्थानी भाषा में अपने स्वतंत्र अभिनय के अंदाज में जो दर्शक को खूब रोमांचित कर गया !
 

नाटक हास्य चूड़ामणि में निर्देशक सौरभ अनंत  ने लेखक महामात्य वत्सराज के प्रयोगात्मक लेखन को प्रस्तुत किया मंच से जिसमे शेक्सपियर के रोमियो जूलियट की पुट नजर आयी मुझे !

नाटक हाय मेरा दिल में निर्देशक प्रीता माथुर /अमन गुप्ता ने लेखक रणवीर सिंह के विचार जो की पति पत्नी के मध्य की शंकाओं और मेडिकल की भ्रांतियों का जिवंत चित्रण को मंचित  किया अपने स्वभिनय से  टीम के साथ  !

नाटक जू स्टोरी में निर्देशक रमेश भाटी नामदेव ने लेखक एडवर्ड एल्बी के मनोविज्ञान के प्रयोगात्मक लेखन को मंच से प्रस्तुत किया !

नाटक द पोर्ट्रेट निर्देशक राजेंद्र  सिंह पायल ने  स्टोरी ओ  हेनरी  पर नाट्य प्रस्तुति दी मंच से जिसमे यथार्थ को चित्रित करने का प्रयास किया गया जो न्याय संगत था रोचकता के साथ !

नाटक जिंदगी रिटायर नहीं होती निर्देशक जी एस चैनी ने लेखक मुन्ना धीमन की परिकल्पना को बहुत ही सरल  रूप में मंच से प्रस्तुत किया ये अपने आप में एक नया प्रयोग सम्प्रेषण के लिए एक वरिष्ठ रंग निर्देशक के जरिये रहा बीकानेर थिएटर फेस्टिवल २०१८ में  !

नाटक कसुमल सपनो  निर्देशक अजित पालावत ने लेखक इप्शिता चक्रवर्ती सिंह के शेक्सपियर के नाटक पर आधारित लेखन को मंच पर मंचित किया !

नाटक ओरंगजेब निर्देशक के एस राजेंद्रन ने लेखक इंदिरा पार्थसारथी के लिखे नाटक को पूर्ण रूप से १६ वि शताब्दी के समय काल के साथ ऐतिहासिक स्वरुप में प्रस्तुत किया !

नाटक मैं , निर्देशक विजय कुमार नाईक ने स्वलिखित नाट्य को बॉक्स थिएटर  फॉर्म में  प्रस्तुत किया ! ये प्रयोगात्मक नाटक बहुत ही सरल और सहज साथ ही प्रभाव पूर्ण प्रस्तुति रही  बीकानेर थिएटर फेस्टिवल २०१८  की !

नाटक फ्लर्ट , निर्देशक  गगन मिश्रा ने लेखक नरेंद्र कोहली के लिखे नाटक को अभिनेता विशाल भट्ट और पूरी टीम के साथ स्व भी अभिनय करते हुए मंच से प्रस्तुत किया ! रचनात्मक दृश्य प्रभाव रचते हुए !

 नाटक लेखक का कुत्ता निर्देशक दयानन्द शर्मा  ने स्वलिखित नाट्य को स्वअभिनीत किया सह कलाकार के साथ मिलकर , मानीवय जीवन के मूल दायित्व और प्रकृति के  जीवों से रिश्ते की बात को मंच से सम्प्रेषित किया !

नाटक मुकाम डेरु जिला नागौर , निर्देशक मोहित टाकलकर ने लेखक परेश मोकाशी के लिखे नाटक को मंचित  किया ! ऐतिहासिक मूल्यों के साथ कुछ छेड़ छाड़ करता सा नाटक सुन्दर दृश्य चित्रों में मंच पर खेला गया !

नाटक नट सम्राट निर्देशक जयंत देशमुख ने लेखक वि वा शिरवाडकर  के लिखे नाटक को बहुत ही सरल मंच सझा के साथ विषय की गम्भीरता को सम्प्रेषित किया ! लम्बे संवाद और मनोविज्ञान के इस प्रयोगात्मक नाट्य ने बीकानेर थिएटर फेस्टिवल की अंतिम प्रस्तुति के रूप में अमिट  छाप छोड़ी दर्शक के मन मस्तिष्क पर,  प्रमाण ये की  नाट्य प्रस्तुति के बाद दर्शक दीर्घा में करीब १० मिनट तक दर्शक  खड़े होकर ताली बजाते रहे,  आयोजक प्रार्थना करते हुए उन्हें  रुकने को कहा पर दर्शक ताली बजाते रहे !  मै  भी शामिल था उन दर्शकों मे ! नट सम्राट नाट्य प्रस्तुति के साथ ही बीकानेर थिएटर फेस्टिवल २०१८ का समापन हुआ इस नयी उम्मीद के साथ की अगले साल बीकानेर थिएटर फेस्टिवल और अधिक   रंग शैक्षणिक प्रस्तुतियों के साथ प्रायोजित  होगा बीकानेर और अनुराग कला केंद्र के माध्यम से बीकानेर रंग जगत और रंग दर्शक के लिए !
 
योगेंद्र कुमार पुरोहित
मास्टर ऑफ़ फाइन  आर्ट
बीकानेर , इंडिया
पता - कमला सदन ,बंगला नगर ,
पुराने शिव मंदिर के पास ,
पूगल रोड , बीकानेर !
पिन -३३४००४
मोब. 9829199686
 ई मेल - yogendrapurohit@yahoo.com

yogendra kumar purohit
Master of Fine Art
Bikaner, INDIA